raag-ramkali-notes-in-hindi

Raag parichay of Ramkali raag notes I Aaroh Avaroh in hindi

Raag description parichay of raag-Ramkali in Indian classical music in hindi is described in this post . Learn indian classical music in simple steps.

राग रामकली

 भैरवी सी है रामकली, बरजे म नि आरोही।

    औडव- सम्पूरन कही, सम्पूरन अवरोही।।

Hindi notes of Ramkali ragas / राग रामकली का परिचय 

इसमें ऋषभ, धैवत कोमल दोनों निषाद तथा दोनों मध्यम प्रयोग किये जाते हैं। इसकी उत्पत्ति भैरव थाट से मानी गई है। वादी संवादी क्रमशः  प- सा है। गायन समय दिन का प्रथम प्रहर है तथा जाति षाडव- सम्पूर्ण है।

आरोह सा ग, म प, नि सां।

अवरोह सां नि प, म प, नि प, ग म रे सा।

पकड़ प, म(t)  प नि प, ग म रे रे सा।

थाट – भैरव थाट

वादी -सम्वादी स्वर – प- सा

जाति – षाडव- सम्पूर्ण

गायन समय – दिन का प्रथम प्रहर

राग रामकली की विशेषता

  • इसमें दोनों मध्यम तथा दोनों निषादों का प्रयोग होता है, तीव्र मध्यम का प्रयोग आरोह में पंचम के साथ जैसे- सा ग म प,   प, म(t)  प नि प, किन्तु कभी ग म(t)  प प्रयुक्त नहीं होता, कोमल नि का वक्र  प्रयोग अवरोह में धैवत के साथ होता है जैसे- प म(t) प, नि प, ग म नि प। तीव्र म और कोमल नि रामकली को भैरव से अलग करते है।
  • इस राग में केवल दो बार भैरव के समान रे और पर आंदोलन किया जाता है। दोनों में यह अंतर है कि भैरव का आंदोलन गंभीर और कई बार, किन्तु रामकली का आंदोलन अपेक्षाकृत चंचल किन्तु कम होता है।
  • यह प्रात: कालीन संधिप्रकाश राग है। नियम यह है कि प्रात कालीन संधिप्रकाश रागों में रे कोमल और ग शुद्ध होने के साथ साथ म भी शुद्ध होना चाहिये। इसमें दोनों मध्यम अवश्य लगते है किन्तु तीव्र म की अपेक्षा शुद्ध म प्रधान है।
  • कुछ विद्वान इसकी जाति सम्पूर्ण मानते हैं, किन्तु आरोह में ऋषभ अति अल्प रखते है, बहुधा उसे भी छोड़ देते हैं और नि सा ग म प-म(t) प प्रयोग करते हैं। कभी कभी नि सा ग म रे, रे ग म प ग म रे रे सा। प्रयोग कर लेते है।

न्यास के स्वरसा और प।

समप्रकृति राग भैरव।

विशेष स्वर संगतियाँ

  • प म(t) प नि प,
  • ग म नि प,
  • सां नि नि प,
  • म(t) प, ग म रे रे सा,
  • ग म प, प, म(t) प,

Raag parichay of all raags in Indian Classical music..

Pdf of Ramkali raag parichay in Indian classical music in hindi is described  in this post  .. Saraswati sangeet sadhana provides complete Indian classical music theory in easy method ..

Click here For english information of this post ..   

Some posts you may like this…

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Scroll to Top
Open chat