raag-chandrakauns notes in hindi

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राग चंद्रकौंस

   गंधार  धैवत कोमल रहे, औडव- औडव रूप।

   मस सम्वाद भैरवी थाट, चंद्रकौंस अनूप।।

Hindi notes of Chandrakauns  / राग चंद्रकौंस का परिचय 

इसे भैरवी थाट जन्य माना गया है। इसमें गंधार और धैवत कोमल लगते है। रे और प स्वर पूर्णतया वर्ज्य है अतः इसकी जाति औडव- औडव है। वादी म और सम्वादी सा है इसका गायन समय मध्य रात्रि है।

आरोह सा म, नि सां।

अवरोह सां नि म, सा।

पकड़ सा, नि सा।

थाट – भैरवी थाट

वादी -सम्वादी स्वर – म – सा

जाति – औडव- औडव

गायन समय – मध्य रात्रि

राग चंद्रकौंस की विशेषता

  • मधुवन्ती के समान यह भी आधुनिक राग है जिसकी रचना मालकोश के निषाद को शुद्ध करने से हुई है।
  • वास्तव में यह हमारे किसी भी थाट में नहीं आता। उच्च स्तर के बहुत से ऐसे राग है जैसे अहिर भैरव, आनंद भैरव, मधुवन्ती, चंद्रकौंस आदि। जो 10 थाटो में से किसी में भी नहीं आते।
  • यह तीनों सप्तकों में समान रूप से गाया जाता है और तीनों सप्तकों में खिलता है।
  • इसमें विलम्बित ख्याल, द्रुत ख्याल, तराना आदि गाये जाते है। इसमें ठुमरी नहीं गाई जाती।
  • इसे गाते समय बीच बीच में शुद्ध निषाद प्रयोग करने की आवश्यकता होती है, इसमें एक ओर चंद्रकौस की स्थापना होती है और दूसरी ओर मालकोश से बचते रहते है।
  • तार सप्तक में कभी कभी शुद्ध ऋषभ प्रयोग करने की प्रथा इस राग में है।

न्यास के स्वर, म और नि।

समप्रकृति राग मालकोश।

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