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Raag parichay of Basant raag Description notes I Aaroh Avaroh in hindi

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राग बसन्त

   दो मध्यम कोमल रिखब, चढत न पंचम कीन्ह।

   स म वादी- सम्वादी ते, यह बसन्त कह दीन्ह।।

                                                             

Hindi notes of Basant / राग बसन्त का परिचय 

Basant Raag description / information in detail-

बसंत की उत्पत्ति पूर्वी थाट से मानी गई है। इसमें दोनों मध्यम तथा रे ध कोमल प्रयोग किये जाते है। आरोह में ऋषभ और पंचम वर्ज्य है, अतः इसकी जाति औडव- सम्पूर्ण है। वादी स्वर सां और संवादी पंचम है। रात्रि का अंतिम प्रहर इसका गायन समय है।

आरोह सा ग, म(t)   रे सां नि सां।

अवरोहरे नि प, म(t) ग म(t) – ग, म(t)   ग म(t) ग, रे सा।

पकड़ म(t) रे सां, नि प, म(t) ग म(t) – ग ।

वर्ज्य स्वर – आरोह में ऋषभ और पंचम वर्ज्य है,

थाट – पूर्वी थाट

वादी -सम्वादी स्वर – सां-प

जाति -औडव- सम्पूर्ण

गायन समय -रात्रि का अंतिम प्रहर

राग बसन्त की विशेषता

  • यह राग उत्तरांग प्रधान राग है। अतः इसकी बढ़त मध्य सप्तक के उत्तरांग तथा तार सप्तक मेंहोती है। इसमें तार सा खूब चमकता है।
  • इसका गायन समय रात्रि का अन्तिम प्रहर है। अतः इसे बसंत ऋतु में किसी भी समय गा सकते है। इसे मौसमी राग भी कहते है।
  • शुद्ध मध्यम का प्रयोग आरोह में केवल इस प्रकार होता है सा म, म ग, म(t) सां। कभी कभी ललित का अल्प अंश दिखा दिया जाता है, जैसे- नि सा, म- म, म(t) म ग। तीव्र म आरोह- अवरोह दोनों में प्रयोग किया जाता है।
  • मध्य सप्तक के और नि से तार सप्तक को जाते समय कोमल ऋषभ प्रयोग करते है, जैसे- नि रे ग- रे सां, किन्तु मध्य सप्तक आरोह में ऋषभ का प्रयोग कभी नहीं होता।
  • इसे परज राग से बचाने के लिए आरोह में अधिकतर निषाद का लंघन कर जाते है जै म(t) सां।

न्यास के स्वर ग, प और सां।

समप्रकृति रागपरज, पूर्वी और पूरियाधनाश्री।

विशेष स्वर संगतियाँ

  • प, म ग म(t) – ग,
  • म(t) रे सां,
  • नि प, म(t) ग म(t) – ग,
  • नि म(t) ग, म(t) ग रे सा, म – म ग, म(t) सां।

Raag parichay of all raags in Indian Classical music..

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