Khayal in Music in Hindi

Khayal in Music in Hindi खयाल गायन शैली – छोटा खयाल व बड़ा खयाल

Khayal in Music in Hindi खयाल गायकी क्या है छोटा खयाल व बड़ा खयाल is described in this post . Learn indian classical music theory in hindi .

Khayal in Music in Hindi

खयाल गायकी –

ख्याल-यह फारसी भाषा का शब्द है। इसका शाब्दिक अर्थ है कल्पना।

गीत का वह प्रकार जिसमें राग के नियमों की रक्षा करते हुए आलाप,तान,बोलतान,खटका,मुर्की, सरगम आदि विभिन्न अलंकारों द्वारा तबले के साथ गायक अपनी भावनाओं को जब अभिव्यक्त करता है,तो ख्याल की रचना होती है।

ख्याल में स्वरों की स्थिरता और चपलता दोनों पर विशेष ध्यान दिया जाता है और गमक का प्रयोग कम किया जाता है ख्याल में इसका प्रयोग ध्रुपद-धमार गायकी की छाया है।

ख्याल में ध्रुपद के समान लयकारी पर जोर नहीं दिया जाता,बल्कि स्वर चमत्कार और स्वर सौंदर्य पर विशेष बल दिया जाता है। अतः ख्याल में स्वर की तुलना में लय और ताल का स्थान गौण होता है। इसमें श्रृंगार रस की प्रधानता होती है

ख्याल के दो प्रकार होते है विलम्बित अथवा बडा ख्याल तथा द्रुत या छोटा ख्याल।

विलम्बित अथवा बडा ख्याल –

यह विलम्बित लय में गाया जाता है,शायद इसलिये इसे विलम्बित अथवा बडा ख्याल कहा जाने लगा।

सके साथ तबले का प्रयोग होता है,अतः एकताल, तिलवाड़ा, झूमरा,झपताल, आड़ा चारताल आदि तबले के ताल इसके साथ बजाए जाते है। बडे ख्याल में शब्द बहुत थोड़े होते है और गीत के केवल दो भाग होते है-स्थाई और अंतरा। मुखडा अधिकतर दो से पांच मात्राओं तक का होता है।

कुछ संगीतज्ञ बडे ख्याल के पूर्व विस्तार में आलाप करते हैं। ख्याल की स्थाई अंतरा बोलने के बाद पुनः स्थाई का मुखड़ा बोलते हैं और राग नियमों के अनुसार स्वरों की बढ़त करते है।

आलाप –

आलाप को कण,खटका,मींड आदि उपकरणों द्वारा सजाया जाता है। बढ़त की आलाप करने के बाद बहलावा, बराबर की तान,दून अथवा चौगुन की तान, बोलतान,लय के साथ बोल- बनाव, सरगम तान इत्यादि बोलते है।

बडे ख्याल के आविष्कारक के विषय में विद्वानों के कई मत है। कुछ मतानुसार पंद्रहवीं शताब्दी में जौनपुर के सुल्तान हुसैन शर्की ने बडे ख्याल का आविष्कार और प्रचार किया। कुछ विद्वान इस मत का विरोध करते है और कहते है कि मुगल बादशाह मुहम्मद शाह ‘रंगीले’ के दरबारी गायक न्यामत खाँ और नौबत खाँ ने, जो संगीत जगत में क्रमशः सदारंग और अदारंग के नाम से प्रसिद्ध है,सर्वप्रथम ख्याल की रचना की।

सदारंग और अदारंग ने अनेक ख्यालों की रचना की और अपने शिष्यों को सिखाकर ख्याल प्रचार किया, लेकिन वे स्वयं ध्रुपद गाते थे ख्याल नहीं। इससे यह समझा जाता है कि उस समय ध्रुपद गायन की प्रतिष्ठा थी और ख्याल को निम्नकोटि का समझा जाता था।

मुहम्मद शाह संगीत के बहुत बडे प्रेमी थे और स्वयं ख्याल की रचना करते थे। सदारंग,अदारंग के बाद हररंग,दिलरंग और कुंवर श्याम आदि ने ख्याल की रचना की और उसके प्रचार-प्रसार में बडा हाथ बटाया।

द्रुत अथवा छोटा ख्याल-

स्वयं नाम से यह स्पष्ट है कि बडे ख्याल की अपेक्षा इसकी लय द्रुत होती है।कहा जाता है कि चौदहवीं शताब्दी में अमीर खुसरो ने सर्वप्रथम कौव्वाली के आधार पर छोटे ख्याल की रचना की।

ये ख्याल साधारणतया तीनताल, झपताल और एकताल में गाये जाते है।

छोटे ख्याल और बडे ख्याल दोनों के गाने का क्रम लगभग समान रहता है, केवल प्रकृति और लय का भेद होता है।

छोटे ख्याल में बडे ख्याल की तरह आलाप, बोल आलाप,बहलावा, विभिन्न प्रकार की ताने,सरगम,कण,मींड,खटका, मुर्की आदि प्रयोग किये जाते है।

Khayal in Music in Hindi

खयाल गायकी क्या है ? खयाल का संक्षिप्त इतिहास क्या है ? खयाल कैसा गीत है ?

गीत का वह प्रकार जिसमें राग के नियमों की रक्षा करते हुए आलाप,तान,बोलतान,खटका,मुर्की, सरगम आदि विभिन्न अलंकारों द्वारा तबले के साथ गायक अपनी भावनाओं को जब अभिव्यक्त करता है,तो ख्याल की रचना होती है।

खयाल गायन शैली में अधिकतर किस रस का प्रयोग किया जाता है ?

इसमें श्रृंगार रस की प्रधानता होती है

खयाल के बोल किस भाषा के होते हैं ?

खयाल के बोल हिन्दी भाषा में होते हैं

खयाल की रचना किसने की थी ? खयाल की रचना कब हुई ?

बडे ख्याल के आविष्कारक के विषय में विद्वानों के कई मत है। कुछ मतानुसार पंद्रहवीं शताब्दी में जौनपुर के सुल्तान हुसैन शर्की ने बडे ख्याल का आविष्कार और प्रचार किया।

खयाल की ताल क्या हैं ? खयाल को किस ताल में गया जाता है ?

खयाल को तीनताल , एक ताल , झप ताल आदि तालों में गया जाता है विलंबित खयाल एक ताल , तिलवाड़ा ताल में गया जाता है । सके साथ तबले का प्रयोग होता है,अतः एकताल, तिलवाड़ा, झूमरा,झपताल, आड़ा चारताल आदि तबले के ताल इसके साथ बजाए जाते है। बडे ख्याल में शब्द बहुत थोड़े होते है और गीत के केवल दो भाग होते है-स्थाई और अंतरा। मुखडा अधिकतर दो से पांच मात्राओं तक का होता है।

खयाल गायन की संगति में कौन सा वाद्य प्रयोग में आता है ?

खयाल गायन में तबले का प्रयोग जादा होता है ।

खयाल गायन शैली में कितने भाग होते हैं ?

खयाल गायन शैली में बंदिश , आलाप , तान , बोल आलाप , बोल तान आदि गायन शैली में आता है ।

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