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Raag Description of Sohani raag parichay notes I Aaroh Avaroh in hindi

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राग सोहनी

  कोमल ऋषभ मध्यम तीवर, पंचम वर्जित मान।

  ध ग संवाद थाट मारवा, संधिप्रकाश पहिचान।।

                                                             

Hindi notes of Sohani / राग सोहनी का परिचय 

Sohani Raag description / information in detail-

इस  मारवा थाट जन्य माना गया है। इसमे रे कोमल मध्यम तीव्र और पंचम वर्ज्य है। वादी धैवत और संवादी गंधार है। आरोह में रे प और अवरोह में केवल पंचम वर्ज्य होने से इसकी जाति औडव -षाडव है। इसका गायन समय रात्रि का अंतिम प्रहर अर्थात प्रात 4 बजे से 7 बजे तक है।

आरोह सा ग म(t) ध नि सां।

अवरोह सां रे सां, नि ध, म(t) ग- म(t) ध  ग म(t) ग, रे सा।

पकड़ सां, नि ध नि ध – म(t) ग, म(t) ध नि सां रे सां।

वर्ज्य  स्वर – आरोह में रे प और अवरोह में केवल पंचम वर्ज्य

थाट – मारवा थाट

वादी -सम्वादी स्वर – ध – ग

जाति – औडव -षाडव

गायन समय -रात्रि का अंतिम प्रहर

सोहनी राग की विशेषता

  • यह चंचल प्रकृति का राग है। विलम्बित आलाप लेने से पूरिया राग की छाया आ सकती है।
  • यह उत्तरांग प्रधान राग है जो अवरोह में अधिक स्पष्ट होता हैं।
  • इसमें ध ग की संगति बहुत अधिक होती है।
  • कुछ संगीतज्ञ राग की रंजकता बढाने के लिए शुद्ध म का प्रयोग करते है। भातखंडे कृत क्रमिक तीसरी पुस्तक के प्रथम हिन्दी संस्करण में पृष्ठ408 पर ‘ काहे तुम आये’ नामक ख्याल में शुद्ध म बडी कुशलता से प्रयोग किया गया है।
  • यह प्रात कालीन संधिप्रकाश राग है और सायंकालीन संधिप्रकाश राग मारवा का प्रातःकालीन प्रतिरूप हैं।

न्यास के स्वर ग, ध और सां

समप्रकृति रागपूरिया और हिंडोल।

सोहनी ग – म(t) ध नि सां, रें सां- नि ध नि ध – म(t) ग।

हिंडोलग म(t) निध सां,  निध – म(t) ग सा।

पूरिया  ग म(t) ध ग म(t) ग, म(t) ग रे सा, नि ध नि रे सा।

विशेष स्वर संगतियाँ

  1. ग म(t) ध नि सां, रें सां,
  2. सां, नि ध नि ध- म(t) ग,
  3. ग म(t) ध ग म(t) ग – रे सा,
  4. ग- म(t) ध नि सां,

Raag parichay of all raags in Indian Classical music..

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