Varn in indian classical music.

Defination of Varn in Indian classical music / वर्ण की परिभाषा

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Varn in Indian classical music / वर्ण की परिभाषा

स्वरों की विभिन्न क्रम अर्थात चाल को वर्ण कहते है और गाने की क्रिया को वर्ण कहते हैं ।

वर्ण चार प्रकार के होते हैं ।

  • स्थाई वर्ण
  • आरोही वर्ण
  • अवरोही वर्ण
  • संचारी वर्ण

Sthai varn / स्थाई वर्ण

जब कोई स्वर एक से अधिक बार उच्चरित किया जाता है , तो उसे स्थाई वर्ण कहते हैं , जैसे – रेरे , गगग , मम आदि ।

Aarohi varn / आरोही वर्ण

स्वरों के चड्ते हुये क्रम को आरोही वर्ण कहते हैं जैसे – सा रे ग म ।

Avarohi varn / आवरोही वर्ण

 स्वरों के उतरते  हुये क्रम को अवरोही  वर्ण कहते हैं जैसे – नि ध प म ग रे सा  ।

Sanchari varn / संचारी वर्ण

उपर्युक्त तीनों वर्णो के मिश्रित रूप को संचारी वर्ण कहते हैं । इसमे कभी तो स्वर उपर चड़ जाता है तो कभी कोई स्वर बार – बार दोहराया जाता है । दूसरे शब्दों में संचारी वर्ण में कभी आरोही , अवरोही  और कभी स्थायी वर्ण दिखाई देता है जैसे – सा सा सा रे ग म प ध प म प म ग रे सा ।

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