tod & baaj in indian classical music

Toda , jod, baaj in Indian classical music in Hindi / तोड़ा की परिभाषा

Defination of Toda , jod , baaj in Indian classical music in Hindi is described in this post of saraswati sangeet sadhana.

Toda in Indian classical music / तोड़ा की परिभाषा

द्रुत स्वर- समूहों को सितार पर बजने को तोड़ा कहते हैं । गायन में इसे तान कहते हैं

Jod in Indian classical music / जोड़

आलाप के संचारी और आभोग भागों को जोड़ कहते हैं । जोड़ का अर्थ जोड़ना है । सितार के आलाप में ध्रुपद के आलाप के समान संचारी भाग से जोड़ प्रारम्भ होता है और आलाप लयबद्ध हो जाता है । जोड़ की गति धीरे  धीरे बड़ाई जाती है । बीच बीच में सं दिखाते हैं । इसमें तैयारी के साथ मींड , गमक,कण, आदि , बजते हैं । जोड़ के अंत में झाला बजाकर आलाप समाप्त करते हैं और गत प्रारम्भ करते हैं ।

Baaj in Indian classical music /  बाज की परिभाषा

इसका तात्पर्ये शैली से है । विभिन प्रकार के बोलों द्वारा सितार बजने को बाज कहते हैं । इसके मुख्य दो प्रकार हैं –

 

दिल्ली बाज –

इसे मसीतखानी बज भी कहते हैं । इस शैली के आविष्कारक मसीत खान थे । इसमें मसीटखनी गत बजाई जाती हैं जिसकी लय विलम्बित  होती है

पूर्वी बाज –

 इसे राजखानी बाज भी कहते हैं । इसे शैली के आविष्कारक लखनऊ के गुलाम रजा खाँ थे । और इसे राजखानी बाज और लखनऊ बाज भी कहते हैं ।

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