vrindavani sarang raag parichye

Raag parichay of Vrindavani sarang / वृंदावनी सारंग राग  का परिचय 

Raag description parichay of vrindavani sarang  in Indian classical music in hindi is described in this post . Learn indian classical music in simple steps.

Raag parichay of Vrindavani Sarang/वृंदवनी सारंग  का परिचय 

वृंदावनी सारंग राग का जन्म काफी थाट से माना गया है । इसमें गंधार और धैवत  वर्ज्य  हैं । अत: इसकी जाति औडव –औडव है । निषाद आरोह में शुद्ध तथा अवरोह में कोमल प्रयोग किया जाता है ।        

 

आरोह :-   .नि सा ,रे ,म प ,नि सां ।

अवरोह:-   सां,नि  प,म रे,सा ।

पकड   :-     नि सा रे ,म रे ,प म रे ,नि सा ।

थाट :- काफी

जाति :- औडव-औडव

विशेषता-

  • सारंग के कई प्रकार हैं ,जैसे शुद्ध सारंग ,मियां की सारंग ,मध्यमादी सारंग आदि ।
  • इसकी रचना उत्तर प्रदेश के एक लोक – गीत के आधार पर हुई है ।
  • इसमें बड़ा ख्याल ,छोटा ख्याल तथा तराना गाया जाता है । इसमें ठुमरी नहीं गाई जाती ।

न्यास के स्वर – सा ,रे और प

मिलते जुलते राग – सूर मल्हार

इस राग की बंदिश , आलाप , तान देखने के लिए यहाँ क्लिक करें –

Raag parichay of all raags in Indian Classical music..

Raag parichay of Vrindavani sarang / वृंदावनी सारंग राग  का परिचय   are described  in this post  .. Saraswati sangeet sadhana provides complete Indian classical music theory in easy method ..

Click here For english information of this post ..   

Some posts you may like this…

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Scroll to Top
Open chat