raag-kedar bandish

Raag parichay of kedar raag notes in hindi

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रागकेदार

दो मध्यम अरू शुद्ध स्वर, मानत थाट कल्याण।

स म वादी सम्वादी से, राग केदार बखान।।

Hindi notes of Kedar raag /  राग  केदार  का परिचय 

रागकेदार

दो मध्यम अरू शुद्ध स्वर, मानत थाट कल्याण।

स म वादी सम्वादी से, राग केदार बखान।।

संक्षिप्त परिचय इस राग को कल्याण थाट जन्य माना गया है।इसमें दोनों मध्यम और अन्य स्वर शुद्ध लगते हैं। वादी म और सम्वादी सा है। आरोह में रे ग और अवरोह में केवल ग स्वर वर्ज्य है, इसलिये इसकी जाति ओडव-षाडव है। इसके गाने बजाने का समय रात्रि का प्रथम प्रहर है।

आरोह सा म, म प, ध प, नि ध सां ।

अवरोहसां नि ध प, म(t)  प ध प म, रे सा ।

पकड़  सा म, म प, म(t)  प ध प म, रे सा ।

राग  केदार की विशेषता

  • तीव्र म आरोह में पंचम के साथ और शुद्ध म आरोह- अवरोह दोनों में प्रयोग किया जाता है। कभी कभी अवरोह में ध से म को आते समय (मींड के साथ) दोनों में एक साथ प्रयोग किया जाता है, जो बडा ही मनोरंजक मालूम होता है।
  • राग विवरण के अन्तर्गत यह बताया गया है कि इस राग में गंधार वर्ज्य है, किन्तु अवरोह में कभी कभी मध्यम पर ग का अनुलगन कण लगाया जाता है जैसे सा म — गप । इस कण के प्रयोग करने से राग की सुन्दरता बढती है और प्रयोग न करने से राग हानि नहीं होती, इसलिये यह कण अनिवार्य है।
  • हमीर के समान इस राग में कभी कभी अवरोह में सुन्दरता बढाने के लिए कोमल नि विवादी स्वर के नाते प्रयोग किया जाता है, जैसे सां ध नि प, म(t) प ध प म ।
  • इसकी चलन वक्र है, किन्तु तानों में वक्रता का प्रयोग शिथिल हो जाता है।

न्यास के स्वरस, म और प।

समप्रकृति राग हमीर और कामोद।

हमीर सा रे सा, ग म ध- म(t)  प, ग म रे सा।

केदार सा, रे सा म, म प, म(t)  प ध प म, प  म – रे सा।

          कामोदसा रे प, ग म प ग म रे सा।

     विशेष स्वर संगतियाँ

  • सा म, म—प,
  • म(t)  प ध प म,
  • म,म रे –  सा,
  • सा म, म प, म(t) प ध प म, रे सा,
  • प प सां रें सां, ध प म

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