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Raag parichay of Gaur sarang raag notes in hindi

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रागगौड़ सारंग

ग ध संवाद करत, कल्याण थाट सब मानत।

दो मध्यम मध्याह्न काल, गौड़ सारंग सब जानत।।

Hindi notes of Gaud Sarang ragas / रागगौड़ सारंग का परिचय 

संक्षिप्त परिचय इस राग की रचना कल्याण थाट से मानी गई है। इसके आरोह- अवरोह में सभी स्वर वक्र  प्रयोग किये जाते है, इसलिये इसकी जाति वक्र सम्पूर्ण है। वादी स्वर गंधार सम्वादी स्वर धैवत है। दोनों मध्यम के अतिरिक्त सभी स्वर शुद्ध लगते है। इसके गाने बजाने का समय मध्याह्न काल है।

आरोह सा, ग रे म ग, प म(t)   ध प, नि ध सां।

अवरोहसां ध नि प, ध म(t)   प, ग रे म ग, प- रे सा।

पकड़सा, ग रे म ग, प- रे सा।

थाट – कल्याण थाट

जाति -वक्र सम्पूर्ण

गायन समय – मध्याह्न काल

मतभेदप्राचीन ग्रन्थकारों ने हमीर, कामोद और केदार राग के समान इसे भी बिलावल थाट का राग माना है । इसका कारण यह है कि इसमें शुद्ध म प्रयोग किया जाता था। जब से इन रागों में तीव्र म प्रयोग किया जाने लगा है इसे कल्याण थाट जन्य राग माना जाने लगा। कुछ आधुनिक संगीतज्ञ  भी इसे कल्याण थाट का राग मानते हैं।

रागगौड़ सारंग की  विशेषता

  • तीव्र मध्यम का अल्प प्रयोग आरोह- अवरोह में केवल पंचम के साथ होता है, किन्तु मध्यम आरोह अवरोह दोनों में प्रयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए इस राग का दूसरा आलाप देखिये।
  • राग की रंजकता बढाने के लिए कभी कभी अवरोह में कोमल नि का अल्प प्रयोग हमीर और केदार राग के समान इसमें भी किया जाता हैं, जैसे- सां ध नि प।
  • इसमे प रे की संगति बहुत दिखाई जाती है। प्रत्येक आलाप के अन्त में इसका प्रयोग किया जाता है।
  • इस राग की चलन वक्र होने के कारण इसे वक्र सम्पूर्ण जाति का राग कहा गया है। तानों में वक्रता कम कर दी जाती है।
  • इसमें निषाद वक्र होने के साथ साथ अल्प भी है।

 न्यास के स्वर सा, ग और प।

विशेष स्वर संगतियाँ

  • सा, ग रे म ग, प रे सा।
  • ग रे म ग,
  • प प सां, रें सां धप म ग।
  • रे ग रे म ग,प- रे- सा।

Raag parichay of all raags in Indian Classical music..

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