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Raag parichay of Ramdasi Malhar raag Description notes I Aaroh Avaroh in hindi

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राग रामदासी मल्हार

 काफी थाट मस संवाद, विकृत गनि संहार।

  वक्र सम्पूरन जाति है,  रामदासी   मल्हार।।

Hindi notes of Ramdasi Malhar raag / राग रामदासी मल्हार का परिचय 

Ramdasi Malhar raag description / information in detail-

इसे काफी थाट जन्य माना गया है। इसमें दोनों गंधार तथा दोनों निषाद प्रयोग किये जाते हैं। वदी मध्यम और संवादी षडज है। जाति वक्र सम्पूर्ण है। गायन समय रात्रि का द्वितीय प्रहर है।

आरोह सा रे प ग म, प निनि प, नि सां।

अवरोहसां निनि प, धपम ग म, प , म रे सा।

पकड़ ध प म ग म, प , म रे सा।

थाट -काफी थाट

वर्ज्य स्वर

जाति – वक्र सम्पूर्ण

वादीसंवादी –  म   – सा

गायन समय – रात्रि का द्वितीय प्रहर है।

राग रामदासी मल्हार की विशेषता:-

  1. रामदासी मल्हार, मल्हार का एक प्रकार है, इस नाते प्रत्येक आलाप म रे सा समाप्त होता है।
  2. वाराणसी के बडे रामदास जी ने इस राग की रचना की थी। उन्हीं के नाम पर इस राग का नाम पड़ा।
  3. वर्षा ऋतु में इसे हर समय गाते- बजाते है।
  4. आरोह में शुद्ध गंधार और निषाद, अवरोह में कोमल गंधार और निषाद प्रयोग किया जाता है, जैसे रे ग म, प म – म रे सा, निनि प, नि सां।
  5. मल्हार के इस प्रकार में मुख्य तीन रागों का मिश्रण है- शहाना, गौड और मल्हार। निनि प तथा म रे सा,शहाना रागांग; नि ध नि सा, रे म रे, तथा म रे सा, मल्हार रागांग; और रे ग म गौड रागांग है।
  6. कुछ प्राचीन विद्वानों ने धैवत- गंधार को क्रमशः वादी संवादी माना है। प्रचार में मध्यम को वादी तथा षडज को संवादी माना है।
  7. कुछ गुनिजन केवल कोमल गंधार को प्रयोग करते है। प्रचार में दोनों गंधार है।
  8. बोलचाल की भाषा में इसे केवल राम दासी नाम से संबोधित करते हैं।

न्यास के स्वरम, प।

समप्रकृति राग मियाँ मल्हार।

रामदासी मल्हार में शुद्ध गंधार प्रयोग करने से यह राग मल्हार तथा इसके अन्य रागों से अलग हो जाता है।

Raag parichay of all raags in Indian Classical music..

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