Raag-Nand-ka-parichay

Raag parichay of Nand raag Description notes I Aaroh Avaroh in hindi

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राग नन्द

 दो मध्यम अरु शुद्ध  स्वर,      गावत राग  आनंद।

  थाट कल्याण षाडव संपूर्ण, प्रथम रात्रि सुखचंद।।

Hindi notes of Nand raag / राग नन्द का परिचय 

Nand Raag description / information in detail-

इस राग को कल्याण थाट जन्य माना गया है। दोनों मध्यम तथा शेष स्वर शुद्ध प्रयोग किये जाते हैं। आरोह में ऋषभ वर्ज्य है और अवरोह में सातों स्वर प्रयोग किये जाते है। इसलिये इसकी जाति षाडव- संपूर्ण है। गायन समय रात्रि का प्रथम प्रहर है।

आरोह सा ग – म, प ध नि प, सां।

अवरोह सां ध नि प, ध म॑प, ग म ध प रे – सा।

पकड़ ग म ध प रे – सा, सा ग – म – – ।

थाट कल्याण थाट

वर्ज्य स्वर – आरोह में ऋषभ वर्ज्य है

जाति – षाडव- संपूर्ण

गायन समय -गायन समय रात्रि का प्रथम प्रहर है।

राग नन्द की विशेषता:-

  1. इस राग को नन्द, आनन्दी या आनन्द कल्याण भी कहते है।
  2. तीव्र म का अल्प प्रयोग अवरोह में पंचम के साथ होता है जैसा कि कल्याण थाट के अन्य रागों में होता है जिनमें दोनों मध्यम प्रयोग किये जाते है, जैसे- कामोद, केदार, हमीर।
  3. इसमें बिहाग, कामोद, गौड़सारंग, और हमीर रागों का सुन्दर मिश्रण है। नि सा ग म और प म॑प राग बिहाग के स्वर समूह है। म॑प ध प और ग म प राग कामोद और हमीर के स्वर समूह और ध प रे सा गौड़सारंग के स्वर है। अतः नन्द राग में इन सब रागों का सुन्दर समन्वय है।
  4. यह अर्ध चंचल प्रकृति का राग है। अतः इसमें विलम्बित आलाप नहीं किया जाता है और इसका गायन भी मंद्र सप्तक में नहीं होता हैं।
  5. इस राग का प्रत्येक आलाप अधिकतर मुक्त मध्यम से समाप्त होता है। आरोह में ही मध्यम पर रूकते है जैसे- सा ग म , किन्तु अवरोह में मध्यम पर नहीं रूकते।
  6. प रे की संगति इस राग में बार- बार दिखाई जाती हैं।
  7. आरोह में धैवत और निषाद अल्प है, इसलिए उत्तरांग में पंचम से सीधे तार सा पर पहुँचते है।

न्यास के स्वर ग, म और प

Raag parichay of all raags in Indian Classical music..

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