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Raag parichay of Lalit raag Description notes I Aaroh Avaroh in hindi

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राग ललित

  द्वै मध्यम कोमल रिखब, पंचम सुर बरजोई।

  सम सम्वादी वादी ते, ललित राग शुभ होई।।

                                                             

Hindi notes of Lalit / राग ललित का परिचय 

Lalit Raag description / information in detail-

पूर्वी थाट जन्यराग ललित में धैवत और ऋषभ कोमल तथा दोनों मध्यम प्रयोग किये जाते है। आरोह- अवरोह दोनों में पंचम पूर्ण रूप से वर्ज्य होने से इसकी जाति षाडव-षाडव मानी जाती हैं। वादी स्वर शुद्ध मध्यम तथा संवादी षडज है। गायन समय दिन का प्रथम प्रहर है।

आरोह नि रे ग म, म(t) म ग, म(t) नि सां।

अवरोह रे नि , म(t) म(t) म ग, रे सा।

पकड़नि रे ग म, म(t) म ग, म(t) म(t) म ग, ग-  म(t) ग रे सा।

वर्ज्य स्वर – प

थाट – पूर्वी थाट

वादी -सम्वादी स्वर – म – सा

जाति – षाडव-षाडव

गायन समय -दिन का प्रथम प्रहर है।

ललित राग की विशेषता

  • , म(t) म ग, इस स्वर समुदाय को मींड में लिया जाता है जो कानों को अधिक प्रिय लगते है। केवल इस स्वर समुदाय में ललित राग स्पष्ट हो जाता है, इसलिये इन स्वरों को ललितांग कहा गया है।
  • मध्य सप्तक में निषाद अल्प प्रयोग होता है किन्तु मंद्र सप्तक में अधिक होता है।
  • शुद्ध धैवत वाले ललित को उत्तरांग में सोहनी, मारवा व पूरिया से बचाने की आवश्यकता होती है। ध म(t) ध ललित और सोहनी दोनों में प्रबल है। इसलिए शुद्ध ध की ललित गाते समय आरोह में निषाद अल्प रखते है।
  • इसकी चलन सा से प्रारंभ न होकर मंद्र नि से होती है, जैसे नि रे ग म।

न्यास के स्वर ग और म।

समप्रकृति राग मेघरंजनी।

विशेष स्वर संगतियाँ

  • नि रे ग म, म(t) म ग,
  • म(t) म(t) म – ग,
  • नि रें नि म(t) म(t) म – ग
  • म म – ग म(t) ग रे सा।

Raag parichay of all raags in Indian Classical music..

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