Jayant-malhar-raag-description-in-hindi

Raag parichay of Jayant Malhar raag Description notes I Aaroh Avaroh in hindi

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Hindi notes of  Jayant Malhar raag / राग जयंत मल्हार का परिचय 

Jayant Malhar raag description / information in detail-

राग जयंत मल्हार की विशेषता:-

 

  • राग जयंत मल्हार
    • इसे काफी थाट जन्य माना जाता है। दोनों गंधार, दोनों निषाद तथा शेष स्वर शुद्ध प्रयोग किये जाते हैं। इसकी जाति वक्र संपूर्ण है। वादी स्वर ऋषभ और संवादी पंचम है। गायन समय रात्रि का द्वितीय प्रहर है।

    आरोह सा, रे प, म प नि ध नि सां।

    अवरोह सां ध नि म प, प म ग रे रे सा, नि सा, ध नि रे, सा।

  •  
    • इस राग में जैजैवंती और मल्हार रागों का सुन्दर मिश्रण है। दोनों को कलात्मक ढंग से मिलाना गायक- वादक की कुशलता पर निर्भर करता है।
    • जब पूर्वांग में जैजैवंती रखते है तो उत्तरांग में मल्हारांग जोड़ते है और जब पूर्वांग में मल्हारांग रखते है तो उत्तरांग में जैजैवंती रखते है। प्रत्येक आलाप के अन्त में जैजैवंती अंग दिखाया जाता है।
    • इसमें (1) सा रे प, (2) नि ध नि सां, (3) ध नि प, (4) म रे सा, स्वर समूह मल्हारांग और (1) ध नि रे,(2) रे ग म ग रे रे सा जैजैवंती अंग के परिचायक है।

    स्वरूप सा, रेसानि सा ध़ ऩि रे म रे सा, निनि प, म प नि ध नि सा, रे सा। रे ग, रे ग म प म ग, म रे प, नि प, म रे सा, नि सा ध, नि रे सा। म रे प, निनि सां, ध नि रे सां, रें गं मं गं रे रें सां, रें नि सां ध, नि म प, रे प म रे सा, ऩि सा ध नि रे सा।

     

Raag parichay of all raags in Indian Classical music..

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