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Raag Description of Tilang raag parichay notes I Aaroh Avaroh in hindi

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राग तिलंग

    ग नि स्वर संवाद करत, मानत औडव जाति।

    दो निषाद खमाज थाट, गावत तिलंग रात्रि।।

Hindi notes of Tilang / राग तिलंग का परिचय 

Tilang Raag description in detail-

 राग तिलंग को खमाज थाट से उत्पन्न माना गया है। इसमें रे ध वर्ज्य है, इसलिये इसकी जाति औडव-औडव है।  वादी स्वर गंधार और संवादी निषाद है। रात्रि के दूसरे प्रहर में इसे गाते बजाते है। इसमें दोनों निषाद प्रयोग किये जाते है।

आरोह सा ग म प नि सां।

अवरोह सां नि प म ग सा।

पकड़नि प ग म ग।

वर्ज्य – स्वर – रे ध वर्ज्य है,

थाट – खमाज थाट

वादी -सम्वादी स्वर – ग – नि

जाति – औडव-औडव

गायन समय -रात्रि का द्वितीय प्रहर

तिलंग राग की विशेषता

  • इसके आरोह में शुद्ध और अवरोह में कोमल निषाद प्रयोग किया जाता है। कभी कभी दोनों साथ भी प्रयोग किये जाते है।
  • राग की सुन्दरता के लिए कभी कभी तार सप्तक के अवरोह में ऋषभ प्रयोग कर लिया जाता है जैसे- नि सां रें सां – नि प।
  • इसमें अधिकतर छोटा ख्याल और ठुमरी गाई जाती है।

न्यास के स्वर सा, ग और प।

विशेष स्वर संगतियाँ

  • नि प, ग म ग।
  • सा ग म प, ग म ग।

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