sixth year music syllabus

Prayag sangeet samiti 6th Sixth year vocal Sangeet Prabhakar syllabus in Hindi

Vocal music syllabus of sangeet prabhakar 6th year of prayaag sangeet samiti in hindi is described in this post .

6th Sixth year vocal- Sangeet Prabhakar

Prayag Sangeet Samiti

गायन  (Vocal )

 

       Max-  500                                                                                                                                                                                  शास्त्र  – 200 , क्रियात्मक – 300

शास्त्र  (Theory )मौखिक

 

First Paper  (  शास्त्र – 100)

 

  • प्रथम से षस्टम  वर्ष तक  के सभी रागों का विस्तृत, तुलनात्मक और सूक्ष्म परिचय  उनके आलाप-तान आदि स्वरलिपि में लिखने का पूर्ण ज्ञान । समप्रकृति रागों में समता-विभिन्नता का ज्ञान होना ।
  • विभिन्न रागों  में अल्पत्व-बहुत्व और अन्य रागों की छाया आदि दिखाते हुए आलाप-तान स्वरलिपि में लिखना
  •  कठिन लिखित स्वर समूहों द्वारा राग पहचानना
  •   दिए हुए रागों में  सरगम बनाना दी हुई कविता को राग में ताल-बद्ध करने का ज्ञान
  • गीतों की स्वरलिपि लिखना, धमार और  ध्रुपद को दुगुन, तिगुन, चौगुन, और आड़ आदि लयकारियों में लिखना
  • ताल के बोल  को विभिन्न लयकारियों में लिखना
  •  लेक  – जीवन में संगीत की आवश्यकता, महफ़िल की गायकी, शास्त्रीय संगीत का जनता पर प्रभाव, रेडियो और सिनेमा-संगीत, पृष्ठ संगीत , हिन्दुस्तानी संगीत और वृंदवादन, हिन्दुस्तानी संगीत की विशेषताये, स्वर का लगाव, संगीत और स्वरलिपि आदि ।
  • हस्सू-हद्दू खां, फैयाज़ खां, अब्दुल करीम खां, बड़े गुलाम अली और ओंकारनाथ ठाकुर का जीवन परिचय और कार्य ।

Second Paper  (  शास्त्र – 100)

 

  •  मध्य कालीन तथा आधुनिक संगीतज्ञों के स्वर स्थानों की आन्दोलन-संख्याओं की सहायता तथा तार की लम्बाई की सहायता से तुलना , पाश्चात्य स्वर-सप्तक की रचना , सरल गुणान्तर और शुद्ध  स्वर संवाद के नियम, पाश्चात्य स्वरों की आन्दोलन-संख्या  हिन्दुस्तानी स्वरों में स्वर संवाद, कर्नाटकी ताल पद्धति और हिन्दुस्तानी ताल पद्धति का तुलनात्मक अध्ययन  संगीत का संक्षिप्त क्रमिक इतिहास, ग्राम, मूर्छना (अर्थ में क्रमिक परिवर्तन), मूर्छना और आधुनिक थाट, कलावंत, पंडित, नायक, वाग्गेयकार, बानी (खंडार, डागुर, नौहार, गोबरहार), गीत , गीत के प्रकार, गमक के प्रकार, हिन्दुस्तानी वाद्यों के विविध प्रकार. (तत, अवनद्ध, घन, सुषरी) आदि ।
  • निम्नलिखित विषयों का ज्ञान – तानपुरे से उत्पन्न होने वाले सहायक नाद, पाश्चात्य  स्वर-सप्तक का सामान स्वरान्तर में परिवर्तित होने का कारन व विवरण, मेजर, माईनर और सेमिटोन, पाश्चात्य आधुनिक स्वरों के गुण-दोष, हारमोनियम पर एक आलोचनात्मक दृष्टि, तानपुरे से निकलने वाले स्वरों के साथ हमारे आधुनिक स्वर-स्थानों का मिलान  प्राचीन, मध्यकालीन तथा आधुनिक राग-वर्गीकरण, उनका महत्त्व, और उनके विभिन्न प्रकारों को पारस्परिक तुलना  संगीत-कला और शास्त्र का पारस्परिक सम्बन्ध  भरत की श्रुतियाँ सामान या समान -इस पर विभिन्न विद्वानों के विचार और तर्क  सारणा चतुष्टई का अध्ययन, उत्तर भारतीय संगीत को ‘संगीत पारिजात’ की देन ।  हिन्दुस्तानी और कर्नाटकी संगीत-पद्धतियों की तुलना, उनके स्वर, ताल और रागों का मिलन करते हुए पाश्चात्य स्वरलिपि पद्धति का साधारण ज्ञान, संगीत के घरानों का संक्षिप्त ज्ञान, रत्नाकर के दस विधि राग वर्गीकरण-भाषा, विभाषा इत्यादि
  • भातखंडे और विष्णु दिगंबर स्वर-लिपियों का तुलनात्मक अध्ययन और उनकी त्रुटीयां  और उन्नति के सुझाव
  •  लेख भावी संगीत के समुचित निर्माण के लिए सुझाव, हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति के मुख्या सिद्धांत  प्राचीन और आधुनिक प्रसिद्ध  संगीतज्ञों का परिचय तथा उनकी शैली, संगीत का मानव जीवन पर प्रभाव, संगीत और चित्त , स्कूलों द्वारा संगीत शिक्षा की त्रुटियों और उन्नति के सुझाव, संगीत और स्वर साधन
  •  पिछले सभी वर्षों के शास्त्र सम्बंधित विषयों का सूक्ष्म तथा विस्तृत अध्ययन

 

क्रियात्मक (Practical)

 

  • राग पहचान में निपुणता और अल्पत्व-बहुत्व, तिरोभाव-आविर्भाव और समता-विभिन्नता दिखाने के लिए पूर्व वर्षों के सभी रागों का  अध्ययन
  •  गायन की तैयारी, आलाप-तान में सफाई , प्रदर्शन  में निपुणता
  • ठप्पा, ठुमरी, तिरवट और चतुरंग का परिचय, इनमे से किन्हीं दो गीतों की जानकारी  आवश्यक
  • राग – रामकली, मियाँ मल्हार, परज, बसंती, राग श्री, पूरिया धनाश्री, ललित, शुद्ध कल्याण, देशी और मालगुन्जी रागों में एक-एक बड़ा-ख्याल और छोटा ख्याल पूर्ण तैयारी के साथ
  •  किन्हीं दो रागों में एक-एक धमार, एक-एक ध्रुपद और एक-एक तराना
  • किसी एक राग में चतुरंग (प्रथम वर्ष से षष्ठम वर्ष एस के रागों में से)।
  • काफी, पीलू, पहाड़ी, झिंझोटी, भैरवी तथा खमाज इनमे से किन्हीं दो रागों में दो ठुमरी तथा किसी एक में टप्पा ।
  • ताल – लक्ष्मी ताल, ब्रह्म ताल तथा रूद्र ताल – इनका पूर्ण परिचय तथा सभी लयकारियों में हाथ से ताली देने का ज्ञान ।

Prayag sangeet samiti syllabus

 Prayag sangeet samiti syllabus (Sixth year vocal- Sangeet Prabhakar) in hindi  is described  in this post  ..

Saraswati sangeet sadhana provides complete Indian classical music theory in easy method ..

Click here For english information of this post ..   

Some posts you may like this…

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Scroll to Top
Open chat