Maargi-&-gandharva-sangeet

Maargi & Gandharva Sangeet in Hindi Indian Music theory

Maargi & Gandharva Sangeet in Hindi Indian Music theory in Hindi is described in this post of Saraswati sangeet sadhana .

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Maargi & Gandharva Sangeet

 

  मार्गी संगीत अथवा गांधर्व संगीत

  • प्राचीन काल में जिस संगीत को मोक्ष प्राप्त करने का साधन माना जाता था, उसे मार्गी संगीत और गांधर्व संगीत कहते थे। कहते है कि सर्वप्रथम ब्रह्मा ने भरत को और भरत ने गांधर्वो को मार्गी संगीत की शिक्षा दी। गांधर्व लोग मार्गी संगीत में प्रवीण होते थे, शायद इसलिये इसे गांधर्व संगीत भी.कहा जाता था।
  • आधुनिक काल में न तो मार्गी संगीत का स्वरूप मिलता है न ही गांधर्व लोग ऐसा लगता है कि गांधर्व लोगों के साथ मार्गी संगीत भी लुप्त हो गया।

मार्गी संगीत की विशेषताएं

  • मार्गी संगीत शब्द प्रधान होता था।
  • मार्गी संगीत के नियमों का कठोरता के साथ पालन करना पड़ता था। नियमों में किसी प्रकार की शिथिलता असंभव थी।
  • मार्गी संगीत अचल संगीत होता था, क्योंकि उसमे तनिक भी परिवर्तन नहीं किया जा सकता था।
  • मार्गी संगीत का एकमात्र लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करना था।
  • लोगों का ऐसा विचार है कि मार्गी संगीत की रचना ब्रह्मा जी ने की, अतः इसे ईश्वर निर्मित माना जाता है।
  • अब.मार्गी संगीत का कोई स्वरूप नहीं मिलता। यह संगीत अब.लुप्त हो गया है।

देशी संगीत अथवा गान

आजकल जिस संगीत का प्रचार है,अथवा जिस संगीत को हम लोग प्रयोग करते है, देशी संगीत अथवा गान कहलाता है। हमारे पूर्वज ने यह अनुभव किया कि संगीत में मोक्ष प्राप्त करने की आध्यात्मिक गुण के अलावा एक ऐसा भी गुण है, जिससे लोगों का मनोरंजन हो सकता है। संगीत में मनोरंजन शक्ति होने के कारण जनता में देशी संगीत प्रचलित हुआ।

  • इस संगीत का मुख्य उद्देश्य जनता का मनोरंजन करना है।अतः इसके नियम बहुत कठोर नहीं बनाये गये है। लोकरूचि मे परिवर्तन के फलस्वरूप देशी संगीत में भी परिवर्तन होने लगा। आज का शास्त्रीय संगीत अनेक परिवर्तन का परिणाम है।

मार्गी संगीत और देशी संगीत में अन्तर

  • मार्गी संगीत शब्द प्रधान और देशी संगीत स्वर प्रधान है।
  • मार्गी संगीत ईश्वर द्वारा निर्मित है और देशी संगीत मनुष्य द्वारा बनाया गया है।
  • मार्गी संगीत के नियम कठोर है और उसमें किसी भी प्रकार का परिवर्तन या शिथिलता असंभव है, देशी संगीत के नियम कठोर नहीं होते,बल्कि उनमें जनरूचि के अनुसार परिवर्तन होता रहा। इसलिये मार्गी संगीत अचल और देशी संगीत चल कहलाता है।
  • मार्गी संगीत अब समाप्त हो गया है लेकिन देशी संगीत का प्रचार है।
  • मार्गी संगीत का उद्देश्य मोक्ष प्राप्त करना था और देशी संगीत का उद्देश्य जन-मनोरंजन है।

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