Harmony-&-Melody in hindi

Description of Harmony & Melody in hindi in indian music

Description of Harmony & Melody in hindi is described in this post of Saraswati sangeet sadhana .

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हार्मनी (Harmony)

  • दो या दो से अधिक स्वरों को एक साथ बजाने से उत्पन्न मधुर भाव को हार्मनी या स्वर सम्वाद कहते हैं। उदाहरण के लिए सा, ग, प या म, ध, स स्वरों को एक साथ बजाने से हार्मनी की रचना होती हैं।
  • पाश्चात्य संगीत हार्मनी प्रधान ही नहीं ब्लकि उसपर आधारित है।
हार्मनी के प्रकार:- हार्मनी के मुख्य दो प्रकार माने गये है।
  • सरल हार्मनी ( simple harmony)
  • किलष्ट हार्मनी (compound harmony)

1.Simple harmony:-

जब किसी रचना को मेल खाने वाले विभिन्न स्वरों से गाया बजाया जाये तो सिम्पल हार्मनी की रचना होगी। चूंकि इनमें एक ही प्रकार का स्वर सम्वाद प्रारंभ से अन्त तक रहता है, इसलिये इसे समांतर हार्मनी भी कहते हैं। इसके दो प्रकार है-

(1) मेगाडाइजिंग सिम्पल हार्मनी

(2)आर्गनाइजिग सिम्पल हार्मनी

1.मेगाडाइजिग सिम्पल हार्मनी:-

जब एक ही रचना को दो या दो से अधिक सप्तकों में गाई बजाई जाये तो उसे मेगाडाइजिग सिम्पल हार्मनी कहते है। जब स्त्री और पुरुष इसे एक साथ मिलकर गाते है तो इसकी रचना होती हैं जैसे पुरूष- सा रे ग रे सा, और नारियाँ सां रें गं रें सां उच्चारण करें। इसमें एक सप्तक से कम का अन्तर नहीं होता।

2.आर्गनाइजिंग हार्मनी:-

जब किसी रचना को गाते बजाते समय एक सप्तक से कम की हार्मनी प्रयुक्त हो तो उसे आर्गनाइजिंग हार्मनी कहते है जैसे एक व्यक्ति षडज से गाये तो दूसरा पंचम से।

Compound Harmony:-

इस प्रकार के स्वर सम्वाद में समानांतर हार्मनी हार्मनी नहीं रह पाती बल्कि बदला करती है इसलिये इसे कम्पाउंड हार्मनी कहते है।

हिन्दुस्तानी संगीत में हार्मनी:-

  • कुछ लोगों का विचार है कि हिन्दुस्तानी संगीत में हार्मनी का कोई महत्व नहीं, किन्तु उनकी यह धारणा गलत है। यह बात अवश्य है कि जितना इसका प्रयोग पाश्चात्य संगीत में होता है उतना हिन्दुस्तानी संगीत में भी।
  • सहगान और सामुहिक गान हिन्दुस्तानी संगीत के लिए कोई नई वस्तु नहीं है। इसमें हार्मनी का प्रयोग स्वतः हो जाता है, क्योंकि स्त्री पुरूष दोनों गाते है।
  • वाद्यवृंद में जहाँ कई वाद्य रहते है्, वहाँ हार्मनी नितांत आवश्यक हो जाती है, चाहे पश्चिमी धुन बजाई जाये या भारतीय।
  • तानपुरा, सितार, वाईलिन, तबला, आदि वाद्यो के मिलाने में तबले का आधार लिया जाता हैं। हिन्दुस्तानी संगीत हार्मनी से बहुत दूर नहीं है बल्कि इसका प्रयोग अपने ही ढंग से होता है।

मेलाडी (Melody)

  • स्वरों के क्रमिक उच्चारण या वादन को मेलाडी कहा गया है जैसे- सा, ग, प आदि को एक दूसरे के बाद गाया बजाया जाये, किन्तु जब इन्हीं स्वरों को अर्थात मेल खाते स्वरों को एक साथ उत्पन्न किया जाये तो.हार्मनी की रचना होगी।
  • हमारा हिन्दुस्तानी संगीत मेलाडी प्रधान है, क्योंकि क्रमिक स्वरोच्चारण इसकी विशेषता है।
  • अगर कई व्यक्ति या वादक मिलकर किसी रचना को एक स्वर में एक साथ गाते बजाते हैं तो उन ध्वनियों से मेलाडी उत्पन्न होगी।

 

मेलाडी और हार्मनी में अंतर

  1. मेलाडी में स्वरों का पृथक-पृथक उच्चारण होता है और हार्मनी में कई स्वरों का एक साथ उच्चारण होता है।
  2. मेलाडी में प्रत्येक स्वर का सम्बन्ध षडज से होता है, किन्तु हार्मनी में उत्पन्न विभिन्न स्वरों का पारस्परिक संबंध प्रमुख हैं।
  3. मेलाडी व्यक्ति के आन्तरिक भावनाओं को और हार्मनी वाह्य वातावरण को व्यक्त करने में सक्षम होती हैं।
  4. मेलाडी हार्मनी पर आधारित है, क्योंकि इसकी रचना स्वर सम्वाद से हुई है।
  5. मेलाडी के लिये एक कण्ठ या एक वाद्य पर्याप्त है, किन्तु हार्मनी में एक से अधिक कण्ठों या वाद्यो की आवश्यकता होती है। इसलिये भारत में सोलो संगीत व पश्चिमी देशों में सामुहिक गान और वृन्दवादन अधिक प्रचलित हैं।

व्यक्तिगत भावों के लिये मेलाडी और सामुहिक भाव प्रदर्शन के लिए हार्मनी उपयुक्त है, जैसे- एक व्यक्ति अपनी माँ से विदा माँग रहा हो तो उसके मनोभावों को व्यक्त करने के लिए मेलाडी उपयुक्त होगी, किन्तु एक सुन्दर दृश्य जैसे – नदी आ किनारा, पक्षियों का कलरव आदि को व्यक्त करने के लिए हार्मनी उपयुक्त होगी ।

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