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Biography of Krishna Rao Shanker Pandit Musician-Jivni in Hindi

Biography ( Lifesketch ) of Krishna Rao Shanker Pandit Musician-Jivni in Hindi is described in this post of Saraswati sangeet sadhana .

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Krishna Rao Shanker Pandit Musician-Jivni

 

कृष्णराव शंकर पंडित की जीविनी 

जन्म:-

संगीत के प्रकाण्ड पंडित श्री कृष्णराव ग्वालियर के निवासी थे। आपका जन्म 26 जुलाई 1894 ई० में ग्वालियर के एक दक्षिणी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। आपके पिता स्वर्गीय पंडित शंकरराव जी एक प्रसिद्ध संगीतज्ञ थे।

संगीत शिक्षा:-

श्री कृष्णराव जी ने संगीत शिक्षा अपने पिता पं० शंकरराव जी से प्राप्त की थी। श्री कृष्णराव के पिता श्री शंकरराव जी ने ग्वालियर के प्रसिद्ध कलाकार हददु खाँ और नत्थू खाँ से आपने संगीत की शिक्षा पाई तथा बाद में श्री निसार हुसैन की देखरेख में संगीत विद्या की 12 वर्षों तक कठोर साधना की। इस प्रकार संगीत के प्रसिद्ध आचार्य द्वारा पूर्ण ज्ञान और अनुभव श्रीशंकरराव पंडित ने अपने पुत्र कृष्णराव जी को दिया। इस प्रकार कृष्णराव जी अपने समय के महान संगीतज्ञ सिद्ध  हुये। आज भी ग्वालियर निवासी आपका गर्व के साथ स्मरण करते हैं।

संगीत कार्यक्रम:-

आपके सरल स्वभाव के साथ जीवन में सदगी और ब्राह्मणोंचित पवित्रता आपके विशिष्ट गुण थे। अलग अलग स्थान पर संगीत सम्मेलनों में अपनी कला का प्रदर्शन करके संगीत के क्षेत्र में अपना विशिष्ट स्थान बना लिया।

गायन शैली:-

पंडित जी की गायन शैली की विशेषता यह थी उसमें आरम्भ से ही लय कायम करके स्थायी के साथ ही आलापचारी रहती थीं। फिर बोलतान, फिरततान, छुटतान, गमक, जमजमा, खटके ,झटके, मींडो को गायन में दिखाया जाता था।

पुस्तकें:-  

आपने संगीत विषयक साहित्य भी लिखा है। हारमोनियम, सितार, जलतरंग, और तबलावादन पर आपने अलग अलग पुस्तकें लिखी है। आपकी रचनाओं में संगीत- सरगम-सार, संगीत प्रवेश, संगीत-आलाप संचारी आदि पुस्तकें प्रसिद्ध है।

शिक्षक के रूप में:-

1913 ई० ने महाराज सतारा ने आपको शिक्षक के रूप में अपने यहाँ रखा परन्तु एक वर्ष बाद ही आपने यह कार्य छोड़ दिया। इसके बाद महाराज ग्वालियर ने पाँच वर्ष तक अपने दरबार में रखा। इस बीच आपने आधुनिक ग्वालियर नरेश और उनकी बहन कमला राज को संगीत शिक्षा दी।

संगीत विद्यालय की स्थापना:-

सन् 1914 में आपने ‘ गांधर्व महाविद्यालय’ नाम से ग्वालियर में एक संस्था स्थापित की। 1917 ई० में उक्त संस्था का नाम अपने पिता की स्मृति में  ‘शंकर गंधर्व’विद्यालय रखा। 1926 में ग्वालियर आलिया कौन्सिल द्वारा आपको तथा उमराव खाँ को दरबारी गायक नियुक्त कर लिया। 1947 में ग्वालियर महाराज (श्रीमन्त जयाजीराव सिंधिया) ने आपको माधव संगीत विद्यालय में सुपरवाइजर अलाउंस देकर नियुक्त किया।

पुरस्कार:-

संगीतोद्वारक सभा, मुलतान ने गायक शिरोमणि अहमदाबाद, अ० ई० संगीत विभाग ने , ‘ गायन विशारद’ और ग्वालियर दरबार ने ‘संगीत रत्नालंकार’ उपाधि से सम्मानित किया। सन् 1959 ई० में आपको राष्ट्रपति पुरस्कार प्रदान किया गया। 1962 ई० में खेरागढ़ विश्वविद्यालय में डायरेक्टर की उपाधि प्राप्त हुई।

प्रमुख शिष्य:-  

आपके चार सुपुत्रों में प्रो. नारायण राव पंडित, प्रो. लक्ष्मणराव पंडित, चंद्रकांत व सदाशिव और शिष्यों में प्रो. विष्णुपंत चौधरी, रामचंद्र राव सप्तऋषि, पुरूषोत्तम राव सप्तऋषि, दत्तात्रेय जोगलेकर, प्रो. केशवराव सुरंगें, एकनाथ आरोलकर के नाम उल्लेखनीय है।

मृत्यु:-

पं० कृष्णराव ग्वालियर घराने के प्रतिनिधि कलाकार थे, जिनका देहावसान 22 अगस्त 1989 को हुआ।

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