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Biography of Amir Khusro Jivni in Hindi

Biography of Vishnu Amir Khusro Jivni in Hindi is described in this post of Saraswati sangeet sadhana .

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Amir Khusro-Jivni

 

  • संगीतजगत में अमीर खुसरो का नाम कभी भी भुलाया नही जा सकता। संगीत को आधुनिक रूप प्रदान कराने में उनका बहुत बड़ा हाथ रहा।
  • अमीर खुसरो का जन्म सन् १२३५ . में एटा जिले के पटियाली नामक स्थान पर हुआ।
  • उनके पिता का नाम अमीर मोहम्मद सेफुद्दीन था जो बलवन से पटियाली आकर बस गये थे।
  • अमीर खुसरो प्रखर बुद्धि के व्यक्ति के थे। अत: पिता की मृत्यु के बाद उसे तत्कालीन गुलाम वंश के राजा गयासुद्दीन बलवन का राजाश्रय प्राप्त हो गया। वहा उनमें साहित्य और संगीत के प्रति विशेष रूचि उत्पन्न हुई।
  • कुछ दिनों तक कई राज्यों में नौकरी करने के बाद वह अलाउद्दीन खिलजी के पास चले गये। अलाउद्दीन खिलजी स्वयं संगीत का बड़ा प्रेमी था।उसने उसे राजगायक बना लिया। खुसरों शायरी भी करते थे और प्रतिदिन अलाउद्दीन खिलजी को नयेनये गजल सुनाते थे। उनके दरबार में कई अन्य संगीतज्ञ भी थे, जिनमें खुसरों को सर्वोच्च स्थान प्राप्त था।
  • कहा जाता हैं कि जब अलाउद्दीन खिलजी ने दक्षिण भारत के देवगिरी राज्य पर चढाई कर विजय प्राप्त की तो अमीर खुसरो भी उनके साथ गये थे। गोपाल नायक वहाँ का राज्य गायक था। उन संगीतज्ञों में प्रतियोगिता हुई और खुसरों ने उन्हें छल कपट से हरा दिया।

 

  • खुसरों को गोपाल नायक के विद्वता की सच्ची परख थी। अत: वह उसे दिल्ली ले गये और उसके सम्पर्क में रहकर संगीत में महत्वपूर्ण कार्य किये,जो इस प्रकार है
  • अमीर खुसरो ने तत्कालीन जन रूचि का अध्ययन किया और उसके अनुकूल नये वाद्य, राग, गीत एवं तालो की रचना की।
  • आधुनिक काल में लोकप्रिय गीत, छोटा ख्याल को जन्म देने का श्रेय उन्हीं को प्राप्त है। कुछ विद्वानों के मतानुसार उन्होंने छोटा ख्याल, कव्वाली तथा तराना तीनों का अध्ययन किया। उनके तराने प्राय: एकताल में होते थे तथा उनमे फारसी के शेर भी होते थे
  • इसके अतिरिक्त अमीर खुसरो ने कई नये वाद्यो को जन्म दिया। कहा जाता हैं कि उन्होंने दक्षिणी वीणा मे चार तार के स्थान पर तीन तार लगायें और उसे सहतार की संज्ञा दी।फारसी में सह के तीन अर्थ होते हैं। सहतार धीरेधीरे बिगड़ताबिगड़ता सितार हो गया।
  • तबले के विषय में भी कुछ विद्वानों ने अमीर खुसरो को इसका रचयिता कहा हैं। कहा जाता है कि उन्होंने पखावज को बीच से दो भागों में विभाजित कर तबले की रचना की।
  • कुछ नये रागों और कुछ नये तालों की रचना की। उनके रचित रागों में पूरिया,साजगिरी,पूर्वी,जिला, सहाना राग आदि, तालों में झूमरा,त्रिताल,आड़ा,चारताल,पश्तो,सूलफांक आदि विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
  • अमीर खुसरो कई भाषाओं के विद्वान थे और 12 वर्ष की अवस्था से कविताएं लिखते थे।
  • कहा जाता हैं कि फारसी और संगीत पर 90 पुस्तकें लिखी जिनमें से केवल 22 ही उपलब्ध है। सन् 1334 में उनके उस्ताद निजामुद्दीन औलिया का देहावसान हो जाने से उन्हें हार्दिक दुख हुआ।उस समय से वे समाज से विरक्त रहने लगे उन्हें अपना जीवन भार स्वरूप मालूम पडने लगा और सन्1335 में अपने प्राण त्याग दिये।
  • दिल्ली में उनकी कब्र उनकी गुरु के पायताने बनाई गयीं है। जहां आज भी प्रतिवर्ष कव्वाल लोग उनकी याद में उर्स मनाते हैं।

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